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KYC Meaning in Hindi – KYC Kya Hai ?

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वर्त्तमान समय में KYC एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट सब्द बन गया है। आप जंहा भी जाईये फिर चाहे वो बैंक अकाउंट खुलवाना हो, आधार कार्ड बनवाना हो या आज के इस नए युग के वॉलेट पेटम में अकाउंट ही क्यों ना बना ना हो हर जगह KYC की जरुरत पड़ती है। तो दोस्तों आज आप इस लेख से जानेंगे की KYC Kya Hai ?

KYC Kya Hai ?  

तो चलिए आइये हम आपको बता ते है की आखिर ये KYC है क्या चीज।

सबसे पहले हमें ये पता होना चाहिए की KYC कहते किसे है । KYC का मतलब होता है “know your customer

RBI ने मनी लॉन्डरिंग को रोकने के लिए और बैंको को मिस युस होने से बचाने के लिए सेक्शन 35A ऑफ़ बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 एंड रूल 7 ऑफ़ प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्डरिंग रूल्स, 2005 के आधार पर ये KYC पॉलिसी को लागु किया जिसकी सहयता से बैंक अपने कस्टमर को ट्रैक कर सके और उनके ट्रांसेक्शन के हिसाब से उन पर नजर रख सके और अगर उन्हें कोई कस्टमर पर संदेह हो तो उसके यूनिक आइडेंटिटी से उसकी जाँच कर सके

KYC एक तरह का आइडेंटिटी कार्ड है जिसकी सहयता से बैंक्स या और बाकि सरकारी संस्थये अपने ग्राहकों को पहचान कर रखती है KYC की सहयता से कस्टमर की आइडेंटिटी, उसका पता, उसके दवरा किये गए बैंक ट्रांसक्शन आदि का विवरण बैंक को आसानी से मिल जाता है।

इन सभी जानकारियों को बैंक संभल कर रखते है। और उन्हें समय समय पर अपडेट करते रहते है जिससे उनके पास अपने हर ग्राहक का पूरा लेखा जोखा सेव रहता है और इसी की सहयता से बैंक ग्राहकों के दवरा किये गए किसी भी हेर फेर को आसानी से पकड़ सकता है

आपको अपना करंट अड्रेस और आइडेंटिटी प्रूफ की जानकारी देनी पड़ती है जिससे आपका KYC अपडेट हो जाता है

KYC Documents 

तो KYC अपडेट करने के लिए सरकार के द्वारा कुछ नियम बनाये गए है जिनके अनुसार आइडेंटिटी प्रूफ में एक व्यक्ति निचे दिए गए किसी भी दस्ता वेज को दे सकते है।

  • पासपोर्ट
  • वोटर आईडी कार्ड
  • पैन कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • आधार कार्ड
  • NREGA दवरा मान्य जॉब कार्ड
  • इ- आधार कार्ड

और अड्रेस प्रूफ के लिए इनमे से कोई दस्ता वेज दे सकते है

  • पासपोर्ट
  • वोटर आईडी कार्ड
  • राशन कार्ड
  • इलेक्ट्रिसिटी बिल
  • बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
  • एलपीजी गैस बिल
  • लैंडलाइन टेलीफोन बिल
  • क्रेडिट कार्ड बिल

पेरिओडिकल अपडेशन ऑफ़  KYC (KYC Status)

बैंको में रिस्क मैनेजमेंट के हिसाब से KYC अपडेट करने का रूल है । इसके हिसाब से हाई रिस्क वाले कस्टमर का KYC हर २ साल में अपडेट किया जायेगा और मध्यम रिस्क वाले कस्टमर का KYC हर ८ साल  में अपडेट किया जायेगा और लौ रिस्क वाले कस्टमर का KYC हर १० साल में अपडेट किया जायेगा।

महत्वपूर्ण एलिमेंट्स ऑफ़ KYC पालिसी

बैंको से रिलेटेड KYC पॉलिसी के ४ महत्वपूर्ण तत्व है ।

  1. Customer Acceptance Policy,
  2. Customer Identification Procedures,
  3. Monitoring of Transactions, and
  4. Risk Management

रिस्क मैनेजमेंट के बेसिस से बैंको ने फिर कस्टमर्स को उनके ट्रांसेक्शन के हिसाब से ३ रिस्क काटेगोरी में बाटा है जिससे उनपे नज़र रखने में बैंक को आसानी होगी । ये रिस्क काटेगोरी निचे दी हुई है

  1. Low रिस्क कस्टमर
  2. Medium रिस्क कस्टमर
  3. High रिस्क कस्टमर

मतलब की जिनके अकाउंट से साधारण ट्रांसेक्शन होते है जैसे की आम आदमी उनको लो रिस्क वाले कैटागोरी में रखा गया है और छोटे  बिज़नेस मैन को मध्यम वर्ग और पॉलिटिशियन और बड़े बिज़नेस मैन को हाई रिस्क वर्ग में रखा गया है ।

e-KYC

वर्तमान समय में KYC को आधार कार्ड से लिंक कर दिया गया है यानि की आधार कार्ड में दिए गए आपके फिंगर प्रिंट्स या आंख की पुतलिया और भी कोई डिटेल्स जो दिए हुए हो । तो आधार कार्ड से लिंक होने का फायदा यह हुआ है की अब आपको KYC अपडेट करवाने के लिए अपने पहचान पत्र या अड्रेस प्रूफ का प्रतिरूप और अपनी फोटो कॉपी देने की कोई जरुरत नहीं । ना ही आपको कोई फॉर्म भरने की जरुरत है । सिर्फ आपको अपने फिंगर प्रिंट्स KYC मशीन में मैच करवाने है अपने आधार नंबर के साथ और हो गया आपका KYC अपडेट ।तो इसे कहते है e-KYC । परन्तु बिना KYC मशीन के ये नहीं हो सकता तो e-KYC के लिए KYC मशीन का होना आवश्यक है । इसलिए जहा पर ये सुभिदा उपलब्ध है वह आप e-KYC के जरिये अपना kYC अपडेट करवा सकते है ।


हम आसा करते है की ऊपर दी हुई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हो अगर इसके बाद भी आपको kYC से रिलेटेड कोई डाउट हो तो आप कमेंट में अपने प्रश्न लिख सकते है ।

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